Wednesday, January 30, 2019

मोदी ने कहा, चार पीढ़ी राज करने वालों को चायवाला दे रहा चुनौती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा है कि वो देश को कांग्रेस की बुराईयों से मुक्ति दिलाना चाहते हैं.

मोदी बुधवार को गुजरात के सूरत में 'न्यू इंडिया यूथ कन्कलेव' नामक प्रोग्राम में बीजेपी समर्थक युवाओं को संबोधित कर रहे थे.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले 70 सालों में इस देश को लूटा गया है.

इस अवसर पर उन्होंने अपने पांच साल के कामकाज का ब्यौरा भी दिया और साथ ही विपक्षी कांग्रेस पर जमकर हमला किया.

कांग्रेस पर हमला करते हुए मोदी ने कहा कि किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि चार-चार पीढ़ी भारत पर राज करने वालों को एक चायवाला चुनौती दे रहा है.

उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो ज़मानत पर घूम रहे हैं, उन्हें जेल जाना पड़ेगा.

ग़ौरतलब है कि नेशनल हेराल्ड अख़बार से जुड़े भ्रष्टाचार के एक केस में राहुल और सोनिया गांधी दोनों ही अभियुक्त हैं और फ़िलहाल दोनों ज़मानत पर हैं.

मोदी ने कहा, ''ये कोर्ट के चक्कर जितने चाहें लगा लें, एक दिन तो उनको जेल में जाना ही पड़ेगा. देश का जिन्होंने लूटा है, उन्हें लौटाना ही पड़ेगा.''

विपक्ष पर हमला करते हुए मोदी ने कहा कि विपक्ष के पास सिर्फ़ एक ही मुद्दा है कि मोदी को कैसे हटाया जाए. उन्होंने कहा कि उनकी चिंता है कि देश की 125 करोड़ जनता कैसे आगे बढ़े.

मोदी ने कहा कि भारत की 125 करोड़ जनता का जन-मन बदल रहा है और उनके अनुसार यही भारत के उज्जवल भविष्य की गारंटी है.

उन्होंने कहा कि सिर्फ़ उनके कहने पर 1.25 करोड़ लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी और 40-45 लाख सीनियर सिटीज़न्स ने रेलवे में सब्सिडी छोड़ दी.

उन्होंने कहा कि जनता में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और निराशा का माहौल ख़त्म हो रहा है.

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार पर हमला करते हुए मोदी ने कहा कि पहले मुंबई, दिल्ली, अयोध्या, जम्मू में आए दिन बम धमाके होते रहते थे लेकिन अब 'आतंकवाद' कश्मीर तक सिमट गया है.

उन्होंने कहा कि देश के जवान अभी भी मारे जा रहे हैं लेकिन वो सोते हुए नहीं मारे जा रहे हैं बल्कि चरमपंथियों से लड़ते हुए मारे जा रहे हैं.

मोदी ने कहा कि आपको मुंबई में हुआ हमला 26/11 भी याद है और उरी पर हुआ हमला भी, लेकिन उरी के बाद हमनें जवाब दिया और सर्जिकल स्ट्राइक किया.

मोदी ने कहा कि बलात्कार पहले भी होते थे लेकिन उनकी सरकार बलात्कारियों को सज़ा देती है. उन्होंने कहा कि अब बलात्कारियों को तीन दिन में फांसी होती है.

उन्होंने मीडिया के रोल पर सवाल उठाते हुए कहा कि मीडिया बलात्कार की ख़बरें तो बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता है लेकिन बलात्कारियों को फांसी दिए जाने की ख़बर पता नहीं कब आकर चली जाती है.

अपनी विदेश नीति की तारीफ़ करते हुए मोदी ने कहा कि इसराइल और फ़लस्तीन दोनों ही भारत के दोस्त हैं. उसी तरह ईरान और सऊदी अरब जो ख़ुद आपस में एक दूसरे के दुश्मन हैं लेकिन दोनों ही देशों से भारत के अच्छे संबंध हैं.

मोदी ने दावा किया कि उनके दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था ने काफ़ी तरक़्क़ी की है. उन्होंने कहा कि 2014 में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में 10वें नंबर पर थी लेकिन अभी छठवें नंबर पर है और बहुत जल्द ही पांचवें नंबर पर होगी.

Tuesday, January 22, 2019

चीन आर्थिक मंदी से परेशान क्यों नहीं है?

चीन ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर जानकारी दी कि साल 2018 में उसकी आर्थिक विकास की दर 28 साल में सबसे धीमी रही.

आंकड़ों के मुताबिक़ बीते साल चीन के सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) की दर 6.6 फ़ीसदी रही.

चीन में दिलचस्पी रखने वाले अंतरराष्ट्रीय जगत और मीडिया के लिए ये सिर्फ़ इस देश के आर्थिक चमत्कार के धुंधला होते जाने का ताज़ा संकेत भर नहीं है बल्कि ये एक ऐसा रुझान है जिसका असर पूरी दुनिया पर होगा.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का कहना है कि चीन में अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ़्तार से दुनिया भर के आर्थिक बाज़ार में गिरावट आ सकती है. ब्रेक्ज़िट में कोई समझौता न होने के साथ ये कारण भी पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है.

लेकिन चीन का कहना है कि 21 जनवरी को जारी किए गए आंकड़े उसकी उम्मीदों के मुताबिक़ ही हैं. चीन पहले ही कह चुका है कि अर्थव्यवस्था में मंदी आने पर वो नियंत्रित तरीक़े से बदलाव करेगा.

चीन का मीडिया भी सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहा है. वो ताज़ा आंकड़ों को भी इसी तरह से पेश कर रहे हैं.

साल 2018 की आखिरी तिमाही में चीन की अर्थ व्यवस्था 6.4 फ़ीसदी की दर से बढ़ी. ये साल 2009 की वैश्विक मंदी के बाद से सबसे धीमी दर है.

चीन में सरकार के नियंत्रण वाले मीडिया ने इसे अमरीका के साथ जारी ट्रेड वार का असर बताने से परहेज किया है.

अमरीका के साथ ट्रेड वार की शुरुआत के पहले भी चीन मंदी से निपटने के उपाय में जुटा था लेकिन इसके बाद उसने अपने प्रयासों की गति बढ़ा दी है.

आंकड़ों की परवाह नहीं
चीन में मीडिया को इस बाद का अंदाज़ा है कि सालाना तरक्की के ताज़ा आंकड़ों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया किस तरह से देखेगा. लेकिन चीन का मीडिया तस्वीर का चमकदार पक्ष ही सामने रख रहा है.

आर्थिक मोर्चे पर वो चीनी प्रगति की दर के मुक़ाबले गुणवत्ता बेहतर करने के प्रयासों की चर्चा कर रहा है.

चीन का मीडिया अमरीका और यूरोपीय यूनियन की लगातार कम रहने वाली जीडीपी दर को लेकर ताने भी नहीं दे रहा है. बल्कि मीडिया का कहना है कि 6.6 फ़ीसदी की वृद्धि दर मौजूदा वक़्त में चीन की ज़रूरतों को सामने रखती है.

चीन के अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है, "विदेशी मीडिया की त्वरित टिप्पणी '28 साल में जीडीपी की सबसे निचली दर' और मंदी के दबाव पर है. ये तथ्य हैं और इन पर सीधे ध्यान देना चाहिए लेकिन सिर्फ़ 'धीमी दर' पर ध्यान लगाने से ग़लत व्याख्या का ख़तरा बन सकता है."

संपादकीय में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था की धीमी दर सरकार के उन फ़ैसलों का असर है, जिनमें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है और तकनीक को उन्नत बनाने की ओर ध्यान दिया जा रहा है.

अख़बार लिखता है, "चीन की विकास दर ऊंची रहती थी लेकिन इसके लिए पर्यावरण और पारिस्थितिकी के मोर्चे पर बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी थी और इस तरह आने वाली दौलत व्यापक असर पैदा करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार में नाकाम रही."

मौजूदा दौर में जब ऊंची विकास दर की 'और अपेक्षा रहेगी', ग्लोबल टाइम्स लिखता है, "6.6 फ़ीसदी की 'सबसे धीमी विकास दर' के मायने ये नहीं हैं कि चीन किसी संकट के मुहाने पर है बल्कि ये कठिन दिक्कतों के समाधान और जोखिमों को नियंत्रित करने की प्रक्रिया है."

यही वजह है कि देश के अंग्रेज़ी भाषा के मुख्य अख़बार ने नेशनल ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स का जिक्र करते हुए 21 जनवरी को शीर्षक दिया, "चीन की जीडीपी 2018 में 6.6 फ़ीसदी तक पहुंची : एनबीएस"

अख़बार ने लिखा, "देश ने साल 2018 में जीडीपी वृद्धि के लिए तय करीब 6.5 फ़ीसदी का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया. एनबीएस का कहना है कि ऐसा ढील देने के बावजूद बीते साल देश की अर्थव्यवस्था की प्रगति अपेक्षाकृत हद में रही."

हालांकि ऐसा लगता है कि चीन का शीर्ष नेतृत्व इन नतीजों को लेकर सहज महसूस नहीं कर रहा है.

कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली ने ब्यूरो की ओर से जारी दूसरे आंकड़ों को ज्यादा ज़ोर से सामने रखा.

अख़बार ने बताया कि चीन की जीडीपी में पहली बार 900 खरब युआन (90 ट्रिलियन) यानी क़रीब 132 खरब डॉलर का इजाफा हुआ.

अख़बार ने इसे 'नया क़दम' बताया. 22 जनवरी के अंक में इस ख़बर को पहले पन्ने पर जगह दी गई. इस ख़बर को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रांतीय पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में दिए गए अहम भाषण की ख़बर के भी ऊपर जगह मिली.

इस अख़बार ने भी 6.6 फ़ीसद वृद्धि के आंकड़े की बात की. साथ ही लिखा, "चीन दुनिया की आर्थिक प्रगति में 30 फ़ीसदी का योगदान देता है और वो सबसे ज़्यादा योगदान देने वाला देश बना हुआ है."

पीपुल्स डेली अख़बार ने दूसरे पन्ने पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी छापी. इसमें उन आंकड़ों को पेश किया गया जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने नज़रअंदाज कर दिया था. अख़बार के मुताबिक़ वर्ष दर वर्ष के हिसाब से 'बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव' से जुड़े देशों के साथ चीन के आयात और निर्यात में 13 फ़ीसदी का इजाफा हुआ है.

लेकिन शायद सबसे ज़्यादा सकारात्मक बात समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने की. समाचार एजेंसी ने कहा कि 6.6 फ़ीसदी वृद्धि के ताज़ा आंकड़े दिखाते हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था 'दुनिया की उम्मीद पर खरी है'.

समाचार एजेंसी के मुताबिक, "ये नतीजे अंतरराष्ट्रीय संरक्षणवाद के मुश्किल हालात में हासिल किए गए हैं और चीन बाहर से भी चुनौतियों का सामना कर रहा है. ये नतीजे चीन की अर्थव्यवस्था की एकाग्रता, दबदबे और करिश्मे को दिखाते हैं."

Thursday, January 10, 2019

सीबीआई को छत्तीसगढ़ में मनमर्जी की छूट नहीं देंगे: बघेल

छत्तीसगढ़ सरकार ने सीबीआई को राज्य में जांच करने और छापा मारने के लिये दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है. राज्य सरकार ने 2001 में यह सामान्य सहमति सीबीआई को दी थी.

अब सीबीआई को अदालत के आदेश से होने वाली जांच और केंद्र सरकार के अधिकारियों के ख़िलाफ़ होने वाली जांच के अलावा किसी भी दूसरी जांच या छापामारी के लिये पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी.

राज्य सरकार ने यह फ़ैसला ऐसे समय में लिया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटा कर उन्हें अग्निशमन सेवा, नागरिक रक्षा और होमगार्ड्स के महानिदेशक की ज़िम्मेवारी सौंपी है.

राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीबीसी से कहा, "पिछले कुछ महीनों में केंद्र की एनडीए सरकार ने सीबीआई की विश्वसनीयता को संकट में डाल दिया है. इसलिए अब यह ठीक नहीं लगता कि सीबीआई को हम अपने राज्य में मनमर्ज़ी की कार्रवाई करने की छूट दें."

उन्होंने सीबीआई पर गंभीर आरोप लगाते हुये कहा, "हम एक संघीय ढांचे में काम करते हैं और सीबीआई को जिस तरह से राज्य में आकर काम करने की छूट दी गई थी, उससे कानून व्यवस्था पर राज्य के अधिकारों का हनन हो रहा था."

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ सालों के अनुभव बताते हैं कि सीबीआई एक स्वतंत्र एजेंसी के तौर पर काम करने में असफल रही है.

इससे पहले पिछले साल नवंबर में आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने भी अपने-अपने राज्यों में सीबीआई को दी गई सामान्य रजामंदी वापस ले ली थी.

राज्य सरकार ने सीबीआई से सामान्य सहमति ऐसे समय में वापस ली है, जब राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके विशेष सचिव व राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा के ख़िलाफ़ सीबीआई की कार्रवाई अदालत में लंबित है.

इस मामले में भूपेश बघेल और विनोद वर्मा जेल भी जा चुके हैं. सीबीआई ने मामले में कुछ महीने पहले ही आरोप पत्र भी पेश किया था.

27 अक्तूबर 2017 की सुबह छत्तीसगढ़ में रमन सिंह सरकार के मंत्री राजेश मूणत से जुड़ी एक कथित सेक्स सीडी के मामले में विनोद वर्मा को छत्तीसगढ़ पुलिस ने ग़ाज़ियाबाद से गिरफ़्तार किया था.

इस मामले में भाजपा के एक पदाधिकारी प्रकाश बजाज ने ही पुलिस में रिपोर्ट दर्ज़ कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि उन्हें एक फ़ोन आया जिसमें उनके 'आका' की सेक्स सीडी बनाने की बात कही गई.

प्रकाश बजाज की एफ़आईआर में विनोद वर्मा के नाम का ज़िक्र नहीं है लेकिन एक दुकान का ज़िक्र था जहां पर कथित तौर पर सीडी की नकल बनाई जा रही थी.

ये एफ़आईआर 26 अक्तूबर की दोपहर साढ़े तीन बजे के आस पास दर्ज की गई थी और इस रिपोर्ट के दर्ज होने के लगभग 11 घंटों के भीतर ही छत्तीसगढ़ पुलिस ने दिल्ली जाकर कथित दुकानदार, फ़ोन करने वाले की जानकारी, तमाम फुटेज एकत्र कर लिये और फिर वहां से गाज़ियाबाद पहुंचकर विनोद वर्मा को गिरफ़्तार कर लिया था.

एक अन्य मामला तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भूपेश बघेल व अन्य लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज किया गया था कि भूपेश बघेल ने राजनीतिक लाभ के लिये कथित सेक्स सीडी का वितरण किया था.

दूसरे मामलों की बात करें तो छत्तीसगढ़ में सीबीआई की अधिकांश जांच और कार्रवाई रिश्वतखोरी या गबन के मामलों से जुड़ी रही है. गबन के कई मामले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने अपने हाथ में लिये हैं.

बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक की हत्या की सीबीआई जांच के दौरान सीबीआई अफसरों द्वारा रिश्वतखोरी का मामला चर्चा में आया था. अफसर के निलंबन और नये सिरे से जांच के बाद भी सीबीआई किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई. यह मामला भी हाईकोर्ट में लंबित है.

Friday, January 4, 2019

क्या रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण की बेटी हैं फ़ौज में अफ़सर?

सोशल मीडिया पर भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की एक तस्वीर वायरल हो रही है.

इस तस्वीर के साथ ये दावा किया जा रहा है कि निर्मला सीतारमण के साथ दिख रहीं महिला अफ़सर उनकी बेटी हैं और वो भारतीय फ़ौज में कार्यरत हैं.

फ़ेसबुक और ट्विटर पर सैकड़ों लोगों ने इसे 'गर्व की बात' बताते हुए लिखा है कि रक्षा मंत्री की तरह भारत के अन्य नेताओं को भी अपने बच्चों को देश की सेवा में लगाना चाहिए.

लेकिन बीबीसी ने अपनी पड़ताल में इस तस्वीर के साथ किए गए दावे को ग़लत पाया.

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ खड़ीं महिला अफ़सर उनकी बेटी नहीं, बल्कि अफ़सर निकिता वेरैय्या हैं.

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वायरल हुई तस्वीर में दिख रहीं महिला अफ़सर निकिता वेरैय्या हैं जो कि रक्षा मंत्री के साथ संपर्क अधिकारी के तौर पर तैनात हैं.

फ़ेसबुक पर उनकी पब्लिक प्रोफ़ाइल देखकर हमने इस बात की पुष्टि भी कि तस्वीर में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ वही हैं.

निकिता की फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल के अनुसार वो कर्नाटक के मैंगलोर शहर से हैं और साल 2016 से भारतीय फ़ौज में कार्यरत हैं.

उन्होंने लिखा, "हाल ही में एक आधिकारिक दौरे के समय महिला अफ़सर की गुज़ारिश पर ये तस्वीर खींची गई थी. जैसा कि कुछ लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर दावा किया, ये महिला अफ़सर रक्षा मंत्री की बेटी नहीं हैं."

संसद के समक्ष बतौर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो घोषणा-पत्र जमा किया है, उसके अनुसार उनकी बेटी और उत्तराधिकारी का नाम वांगमई पारकाला है.

रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि 27 दिसंबर को इस तस्वीर को पहली बार सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था.

इसके बाद इस तस्वीर को सार्वजनिक रूप से न सिर्फ़ सोशल मीडिया पर, बल्कि व्हॉट्सऐप पर भी काफ़ी शेयर किया गया है.